
आई एस 19450 : 2025
शिक्षा में ई-पाठ्यपुस्तकों — अपेक्षाएँ
यह भारतीय मानक शिक्षा एवं प्रशिक्षण में उपयोग किए जाने वाले ई-पाठ्यपुस्तकों के शैक्षणिक, कार्यात्मक तथा तकनीकी आवश्यकताओं को निर्दिष्ट करता है। इसे भारत में डिजिटल शिक्षण के बढ़ते उपयोग को समर्थन देने तथा विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म, उपकरणों और संस्थानों में ई-पाठ्यपुस्तकों की एकरूपता, गुणवत्ता और पारस्परिक अनुकूलता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह औपचारिक तथा अनौपचारिक दोनों प्रकार के शिक्षण परिवेशों पर लागू है और पूर्व-प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक सभी स्तरों को आच्छादित करता है।
यह ई-पाठ्यपुस्तकों, डिजिटल सामग्री, ई-पाठ्यपुस्तक रीडर, शिक्षण उपकरण, अंतःक्रिया तथा शिक्षण सहयोग से संबंधित प्रमुख अवधारणाओं को परिभाषित करता है और ई-पाठ्यपुस्तक प्रणालियों की अनुशंसित कार्यक्षमताओं के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करता है। इसमें सामग्री संरचना, समर्थित फ़ाइल प्रारूप, पैकेजिंग, मेटाडेटा, सुगम्यता, पारस्परिक अनुकूलता तथा अंतःक्रियात्मकता से संबंधित आवश्यकताएँ निर्धारित की गई हैं, जिससे ऑनलाइन एवं ऑफ़लाइन दोनों प्रकार से उपयोग संभव हो सके। साथ ही, टिप्पणियाँ (एनोटेशन), मूल्यांकन, सामग्री पुनर्गठन तथा वैयक्तिकृत शिक्षण की सुविधाएँ भी सम्मिलित की गई हैं, जिससे शिक्षार्थियों की सहभागिता और अधिगम परिणामों में वृद्धि हो।
यह मानक गोपनीयता, डिजिटल अधिकार प्रबंधन तथा कॉपीराइट स्वीकृति से संबंधित प्रावधानों को भी संबोधित करता है, ताकि बौद्धिक संपदा का संरक्षण और उत्तरदायी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। यह मानक शिक्षार्थियों, शिक्षकों, सामग्री विकसितकर्ताओं, प्रकाशकों तथा सेवा प्रदाताओं के उपयोग हेतु अभिप्रेत है और देश में एक सुसंगत, समावेशी एवं भविष्य-उन्मुख डिजिटल शिक्षा पारितंत्र को प्रोत्साहित करने का उद्देश्य रखता है।
Last Updated on फ़रवरी 13, 2026