
आई एस 19598:2026
ई-कॉमर्स — स्वशासन के लिए सिद्धांत और दिशानिर्देश
यह भारतीय मानक डिजिटल बाज़ारों में पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ई-कॉमर्स संचालन के लिए स्वशासन के सिद्धांतों और दिशानिर्देशों को निर्दिष्ट करता है। इसे ई-कॉमर्स के तेज़ी से बढ़ते विस्तार और ऑनलाइन लेन-देन में शामिल उपभोक्ताओं तथा अन्य हितधारकों के हितों की सुरक्षा करते हुए नैतिक व्यावसायिक प्रथाओं को प्रोत्साहित करने के लिए स्पष्ट मानदंड स्थापित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है।
यह मानक ई-कॉमर्स लेन-देन के लिए एक संरचित रूपरेखा प्रस्तुत करता है, जिसमें प्रक्रियाओं को तीन प्रमुख चरणों में विभाजित किया गया है: पूर्व-लेन-देन, अनुबंध निर्माण और पश्चात-लेन-देन। इसमें विक्रेता पंजीकरण और सत्यापन, उत्पाद सूचीकरण की आवश्यकताएँ, आवश्यक जानकारी का प्रकटीकरण, तथा उत्पाद और सेवाओं से संबंधित विवरणों का स्पष्ट प्रदर्शन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर मार्गदर्शन प्रदान किया गया है, ताकि उपभोक्ता सूचित निर्णय ले सकें। इसके अतिरिक्त, उपभोक्ता की स्पष्ट सहमति प्राप्त करने, लेन-देन की समीक्षा की सुविधा देने, ऑर्डर की पुष्टि जारी करने, लेन-देन का अभिलेख बनाए रखने और सुरक्षित एवं विविध भुगतान विकल्प उपलब्ध कराने से संबंधित प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
यह मानक पश्चात-लेन-देन से संबंधित दायित्वों पर भी बल देता है, जिनमें वस्तुओं की उपयुक्तता, समय पर डिलीवरी सूचना, विवाद निवारण तंत्र तथा वापसी, रद्दीकरण और धनवापसी के लिए पारदर्शी नीतियाँ शामिल हैं। इसके साथ ही यह व्यापक शासन सिद्धांतों को भी रेखांकित करता है, जैसे निष्पक्ष व्यावसायिक प्रथाएँ, उपभोक्ता डेटा की सुरक्षा, अनचाहे व्यावसायिक संचार की रोकथाम, नकली उत्पादों के विरुद्ध उपाय, तथा लागू कानूनों का अनुपालन।
समग्र रूप से, यह मानक जिम्मेदार ई-कॉमर्स प्रथाओं को बढ़ावा देने, उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत करने तथा एक विश्वसनीय और सतत डिजिटल वाणिज्यिक पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को समर्थन देने के लिए एक स्वैच्छिक रूपरेखा स्थापित करता है।
Last Updated on मार्च 10, 2026