
आई एस 19850 : 2026
ई22, ई25, ई27 एवं ई30 ईंधन — पॉज़िटिव इग्निशन इंजन चालित वाहनों में उपयोग हेतु निर्जल एथेनॉल और मोटर गैसोलीन के मिश्रण — विशिष्टि
एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी है और आयातित पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करके भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाता है। वर्ष 2025 में IS 17021 के अंतर्गत देशभर में ई20 ईंधन लागू किए जाने के बाद, भारतीय मानक ब्यूरो ने IS 19850 : 2026 तैयार किया है, जो भारत के एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को बीस प्रतिशत से आगे बढ़ाता है। यह मानक भारत सरकार की 2020 से 2025 की जैव ईंधन नीति के अनुरूप है।
यह भारतीय मानक ई22, ई25, ई27 एवं ई30 ईंधनों के लिए आवश्यक गुणवत्ता मानदंड, नमूना लेने की विधि और परीक्षण प्रक्रियाएँ निर्धारित करता है। ये ईंधन IS 15464 के अनुरूप निर्जल एथेनॉल तथा IS 2796 के अनुरूप एथेनॉल-रहित मोटर गैसोलीन को क्रमशः बाईस, पच्चीस, सत्ताईस और तीस प्रतिशत आयतन अनुपात में मिलाकर बनाए जाते हैं। ये सभी ईंधन पॉज़िटिव इग्निशन इंजन अर्थात पेट्रोल इंजन से चलने वाले वाहनों के लिए उपयुक्त हैं।
इस मानक में घनत्व, आसवन व्यवहार, रिसर्च ऑक्टेन संख्या, मोटर ऑक्टेन संख्या, सल्फर की मात्रा, सीसे की मात्रा, वाष्प दाब, बेंजीन की मात्रा, सुगंधित तत्वों की मात्रा, ऑक्सीकरण स्थिरता, एथेनॉल की मात्रा और जल की मात्रा जैसे गुणवत्ता मापदंड निर्धारित किए गए हैं। E22 के लिए न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन संख्या पचानवे तथा ई25, ई27 एवं ई30 के लिए सत्तानवे निर्धारित की गई है। संक्षारण रोधक, एंटीऑक्सीडेंट, धातु निष्क्रियकारक, रंजक और बहुकार्यी योजक मिलाने की अनुमति है, जबकि फॉस्फोरस, सिलिकॉन, तांबा, सीसा और क्लोरीन युक्त योजकों का उपयोग पूर्णतः वर्जित है।
यह मानक ब्राज़ील के एथेनॉल ईंधन विनिर्देशों सहित अंतरराष्ट्रीय अनुभव पर आधारित है और पच्चीस प्रतिशत से अधिक एथेनॉल युक्त ईंधनों की ऑक्टेन रेटिंग के लिए संशोधित परीक्षण विधियाँ भी शामिल करता है। खुदरा पेट्रोल पंपों पर डिस्पेंसिंग मशीनों पर यथास्थिति ई22, ई25, ई27 या ई30 पेट्रोल का लेबल लगाना अनिवार्य किया गया है।
Last Updated on जून 1, 2026