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माह का मानक


IS 19880: 2026

प्लास्टिक अपशिष्ट पायरोलिसिस में वायु प्रदूषण नियंत्रण — रीति संहिता

यह भारतीय मानक प्लास्टिक अपशिष्ट के पायरोलिसिस (pyrolysis) के दौरान उत्पन्न होने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने हेतु मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह एक थर्मोकेमिकल प्रक्रिया है, जिसमें 400 °C से अधिक तापमान पर, ऑक्सीजन-रहित वातावरण में, लंबी श्रृंखला वाले बहुलकों (polymers) को पायरोलिसिस तेल, सिनगैस (syngas) और चार (char) में विघटित किया जाता है। यह मानक निकलने वाले प्रदूषकों — कणिकीय पदार्थ (PM), कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर एवं नाइट्रोजन ऑक्साइड, पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAH), तथा ट्रेस मात्रा में डाइऑक्सिन/फ्यूरान एवं भारी धातुओं — की पहचान करता है, और यह बताता है कि PVC, PP/PE तथा PS जैसे विभिन्न प्लास्टिक फीडस्टॉक के अनुसार उत्सर्जन प्रोफाइल किस प्रकार भिन्न होती है।

यह मानक प्रत्येक प्रदूषक हेतु विशिष्ट नियंत्रण उपाय निर्धारित करता है: कणिकीय पदार्थ के लिए बैगहाउस फिल्टर, साइक्लोन सेपरेटर तथा इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर; VOC को सीमित करने के लिए उत्प्रेरक पायरोलिसिस (catalytic pyrolysis) एवं प्रक्रिया अनुकूलन; सल्फर ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन क्लोराइड के लिए ड्राई सॉर्बेंट इंजेक्शन एवं वेट स्क्रबर; नाइट्रोजन ऑक्साइड के लिए चरणबद्ध पायरोलिसिस के साथ चयनात्मक उत्प्रेरक/गैर-उत्प्रेरक न्यूनीकरण (SCR/SNCR); तथा डाइऑक्सिन एवं फ्यूरान के लिए सक्रिय कार्बन इंजेक्शन या उत्प्रेरक विनाश प्रणाली। कार्बन मोनोऑक्साइड, PAH, भारी धातुओं, हाइड्रोजन साइनाइड एवं अमोनिया हेतु अतिरिक्त उपाय भी दिए गए हैं, साथ ही अतिरिक्त सिनगैस के पुनर्चक्रण, नियंत्रित फ्लेयरिंग तथा फ्यूजिटिव उत्सर्जन स्रोतों की सीलिंग की भी सिफारिश की गई है।

यह मानक संचालन एवं निगरानी प्रथाओं की भी सिफारिश करता है, जिनमें फीडस्टॉक का पृथक्करण, चार एवं पायरोलिसिस तेल का उपयोग, सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (CEMS) की स्थापना, तापमान एवं निवास समय जैसे प्रमुख मापदंडों का रखरखाव, तथा मास/ऊर्जा संतुलन का दस्तावेजीकरण शामिल है।

Last Updated on September 7, 2026

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