
आई एस 19671 : 2026 / ISO 5201 : 2024
वित्तीय सेवाएँ — कोड–स्कैनिंग भुगतान सुरक्षा
यह भारतीय मानक वित्तीय सेवाओं में उपयोग होने वाली कोड-स्कैनिंग भुगतान प्रणालियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकताओं को निर्दिष्ट करता है, जिसका उद्देश्य मोबाइल-आधारित लेनदेन को धोखाधड़ी, डेटा उल्लंघन और परिचालन जोखिमों से सुरक्षित रखना है। इसे डिजिटल भुगतान में क्यूआर कोड जैसी तकनीकों के बढ़ते उपयोग को ध्यान में रखते हुए तथा अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप विकसित किया गया है। यह मानक उन लेनदेन पर केंद्रित है, जिनमें भुगतान कोड को भुगतानकर्ता या प्राप्तकर्ता द्वारा मोबाइल उपकरण के माध्यम से स्कैन किया जाता है।
यह कोड-स्कैनिंग भुगतान के लिए एक सुव्यवस्थित रूपरेखा प्रस्तुत करता है, जिसमें भुगतानकर्ता, प्राप्तकर्ता, भुगतान सेवा प्रदाता और कोड सेवा प्रदाता जैसे प्रमुख पक्षों की भूमिकाओं को परिभाषित किया गया है। मानक भुगतान प्रणालियों को दो मुख्य प्रकारों—भुगतानकर्ता-प्रस्तुत और प्राप्तकर्ता-प्रस्तुत—में वर्गीकृत करता है तथा दोनों में लेनदेन को पूरा करने के अनिवार्य चरणों का वर्णन करता है।
यह मानक व्यापक जोखिम आकलन पर विशेष बल देता है और अनधिकृत पहुँच, कोड में छेड़छाड़, डेटा लीक तथा असुरक्षित संचार जैसे सामान्य एवं विशिष्ट जोखिमों की पहचान करता है। साथ ही यह सुनिश्चित करने हेतु सुरक्षा उद्देश्यों को परिभाषित करता है कि केवल अधिकृत पक्ष ही भुगतान शुरू करें और प्राप्त करें, तथा लेनदेन से संबंधित जानकारी सुरक्षित और सही बनी रहे।
इसके अतिरिक्त, यह मानक न्यूनतम सुरक्षा आवश्यकताओं और अतिरिक्त दिशानिर्देशों को निर्धारित करता है, जिनमें प्रमाणीकरण तंत्र, एन्क्रिप्शन, सुरक्षित कोड निर्माण तथा साइबर हमलों से सुरक्षा के उपाय शामिल हैं। समग्र रूप से, यह मानक डिजिटल वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में कोड-स्कैनिंग भुगतान प्रणालियों की सुरक्षा, विश्वसनीयता और भरोसे को सुदृढ़ करने के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करता है।
Last Updated on April 10, 2026