
IS 19835:2026
जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर (ZTA) — कार्यान्वयन ढांचा
यह भारतीय मानक संगठनों को जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर (Zero Trust Architecture – ZTA) लागू करने के लिए एक विस्तृत मार्गदर्शिका प्रदान करता है, जिससे उनकी साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाया जा सके। पारंपरिक सुरक्षा प्रणाली यह मानकर चलती है कि संगठन के नेटवर्क के भीतर मौजूद उपयोगकर्ता और उपकरण सुरक्षित हैं, जबकि Zero Trust का सिद्धांत “कभी भी स्वतः विश्वास न करें, हमेशा सत्यापन करें” पर आधारित है। अर्थात् किसी भी उपयोगकर्ता, डिवाइस, एप्लिकेशन या सेवा को संसाधनों तक पहुँच देने से पहले उसकी पहचान, अनुमति और सुरक्षा स्थिति की हर बार जाँच की जाती है तथा केवल आवश्यक न्यूनतम पहुँच ही प्रदान की जाती है।
इस मानक में पहचान-आधारित पहुँच नियंत्रण, बहु-कारक प्रमाणीकरण (Multi-Factor Authentication), न्यूनतम विशेषाधिकार (Least Privilege), निरंतर निगरानी, जोखिम-आधारित निर्णय तथा सुरक्षित संचार जैसे Zero Trust के प्रमुख सिद्धांतों का वर्णन किया गया है। साथ ही, पहचान प्रबंधन, प्रमाणीकरण एवं प्राधिकरण, नीति प्रशासन, नीति प्रवर्तन, सुरक्षा निगरानी तथा वास्तविक समय में निर्णय लेने वाले विभिन्न घटकों की भी जानकारी दी गई है।
मानक में माइक्रो-सेगमेंटेशन, नैनो-सेगमेंटेशन, सर्विस एक्सेस गेटवे तथा सॉफ्टवेयर-डिफाइंड परिमीटर जैसी तकनीकों का भी उल्लेख है, जो साइबर हमलों के प्रभाव को सीमित करने और अनधिकृत पहुँच को रोकने में सहायता करती हैं। इसके अतिरिक्त, Zero Trust अपनाने के लिए परिपक्वता मॉडल, माइग्रेशन रणनीति तथा मूल्यांकन पद्धति भी दी गई है, जिससे संगठन अपनी साइबर सुरक्षा क्षमता का आकलन कर उसे चरणबद्ध तरीके से बेहतर बना सकें। यह मानक सरकारी तथा निजी दोनों प्रकार के संगठनों के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और आधुनिक डिजिटल अवसंरचना विकसित करने में उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान करता है।
Last Updated on August 6, 2026