इस सप्ताह का मानक


आई एस 19526 : 2026

डिजिटल प्लेटफॉर्म अनुरूपता आंकलन

यह भारतीय मानक डिजिटल प्लेटफॉर्मों के अनुरूपता मूल्यांकन के लिए आवश्यकताओं को निर्दिष्ट करता है, जो उनकी कार्यक्षमता, प्रदर्शन, साइबर सुरक्षा और उपयोगिता जैसे सिस्टम आवश्यकताओं के अनुरूप होने का मूल्यांकन करने हेतु एक सुव्यवस्थित ढांचा प्रदान करता है। इसे डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अनुरूप विकसित किया गया है तथा यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एसटीक्यूसी (STQC) द्वारा जारी दिशानिर्देशों पर आधारित है, जिससे नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवाओं की पारदर्शी, प्रभावी और विश्वसनीय डिलीवरी सुनिश्चित की जा सके।

यह मानक मूल्यांकन के प्रमुख पहलुओं को समाहित करते हुए एक व्यापक ढांचा प्रस्तुत करता है, जिसमें सॉफ्टवेयर अनुप्रयोग, आईटी अवसंरचना, प्रक्रियाएं तथा सेवा स्तर समझौते (SLA) शामिल हैं। मूल्यांकन चार स्तरों — डेटा, अनुप्रयोग, अवसंरचना और प्रक्रिया — पर किया जाता है, जिससे परीक्षण, ऑडिट, कोड समीक्षा और दस्तावेज़ विश्लेषण के माध्यम से समग्र सत्यापन सुनिश्चित होता है। अनुरूपता मूल्यांकन दो चरणों — प्री-गो-लाइव और पोस्ट-गो-लाइव — में किया जाता है, ताकि कार्यान्वयन से पहले तैयारी और कार्यान्वयन के बाद प्रदर्शन का सत्यापन किया जा सके।

यह मानक गुणवत्ता आश्वासन और जोखिम न्यूनीकरण पर विशेष बल देता है, जिसमें सुरक्षा परीक्षण, भेद्यता मूल्यांकन, प्रदर्शन परीक्षण, अंतर-संचालन क्षमता तथा उपयोगिता का मूल्यांकन शामिल है। साथ ही, यह परियोजना दस्तावेजों की समीक्षा, आईटी अवसंरचना के ऑडिट तथा SLA मापन प्रणाली के सत्यापन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश प्रदान करता है, जिससे डिजिटल प्रणालियों की सटीकता, विश्वसनीयता और विस्तार क्षमता सुनिश्चित हो सके।

इसके अतिरिक्त, यह मानक विभिन्न हितधारकों जैसे ग्राहक, समाधान प्रदाता तथा तृतीय पक्ष अनुरूपता मूल्यांकन एजेंसी (3PCAA) की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है तथा अनुपालन के मानदंड, स्कोरिंग प्रणाली और आवश्यक डिलीवेरेबल्स को निर्धारित करता है। यह ढांचा गैर-अनुरूपताओं की पहचान और उनके समाधान की एक व्यवस्थित प्रक्रिया को सुनिश्चित करता है, जिससे देश में सुरक्षित, प्रभावी और उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल शासन प्रणाली को बढ़ावा मिलता है।

Last Updated on मार्च 23, 2026