माह का मानक


आई एस 17900 (Part 7/Sec 4): 2025

व्यक्तियों और सामानो के परिवहन के लिए लिफ्ट भाग 7 विशेष अनुप्रयोगों के लिए लिफ्ट अनुभाग 4 दिव्यांगजन के लिए लिफ्ट की अपेक्षाएँ

यह भारतीय मानक भवनों में दिव्यांगजनों के लिए सुरक्षित, स्वतंत्र एवं समान रूप से सुलभ आवागमन सुनिश्चित करने हेतु लिफ्टों के लिए न्यूनतम तकनीकी एवं कार्यात्मक आवश्यकताओं को परिभाषित करता है। IS 17900 (भाग 7/अनुभाग 4): 2025 के रूप में प्रकाशित यह मानक, IS 15330:2020 का प्रतिस्थापन है और व्यक्तियों एवं सामान के परिवहन हेतु लिफ्टों से संबंधित राष्ट्रीय मानकों की श्रृंखला का एक अभिन्न भाग है। यह मानक भारत में सार्वभौमिक अभिगम्यता हेतु सामंजस्यपूर्ण दिशानिर्देश एवं मानक (2021) तथा दिव्यांगजन अधिकार (संशोधन) नियम, 2023 के अनुरूप है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर समावेशन एवं अभिगम्यता के उद्देश्यों को समर्थन मिलता है।

मानक में सुलभ मार्गों पर लिफ्ट के स्थान निर्धारण, प्रवेश द्वारों की अभिकल्पना, न्यूनतम 900 मिमी का स्पष्ट द्वार-खुलाव, समायोज्य द्वार-खुले रहने का समय (3 सेकंड से 20 सेकंड), तथा गैर-संपर्क सुरक्षा संवेदकों जैसे प्रावधानों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है। इसमें व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए उपयुक्त न्यूनतम लिफ्ट कार आयाम निर्दिष्ट किए गए हैं तथा सार्वजनिक भवनों के लिए बड़े आयामों की अनुशंसा की गई है। सुरक्षित चढ़ने एवं उतरने के लिए ±10 मिमी की रुकने की शुद्धता तथा ±20 मिमी की लेवलिंग शुद्धता भी निर्धारित की गई है।

इसके अतिरिक्त, मानक में लिफ्ट कार के आंतरिक प्रावधानों जैसे हैंडरेल, न्यूनतम 100 लक्स प्रकाश व्यवस्था, फिसलन-रोधी फर्श, बैठने की व्यवस्था, तथा एलर्जी उत्पन्न करने वाली सामग्रियों से बचाव से संबंधित आवश्यकताएँ सम्मिलित हैं। नियंत्रण उपकरणों, दृश्य एवं श्रव्य संकेतों, स्पर्शनीय/ब्रेल चिह्नों, आपातकालीन संचार प्रणालियों तथा स्वचालित बचाव उपकरण (ARD) के लिए भी विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

इन व्यापक प्रावधानों के माध्यम से यह मानक लिफ्टों की अभिकल्पना, स्थापना एवं संचालन में एकरूपता, सुरक्षा और उपयोगिता को बढ़ावा देता है तथा भारत में आवासीय एवं सार्वजनिक भवनों में समावेशी, सुलभ एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल अवसंरचना के विकास में महत्वपूर्ण योगदान करता है।

Last Updated on जनवरी 8, 2026